कर्नाटक में एक कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान, पार्टी कार्यकर्ताओं ने ‘डीके-डीके’ के नारे लगाना शुरू किया, जिससे पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी भड़क गए। उन्होंने मंच पर उपस्थित समर्थकों से कहा कि “तुम लोग निकम्मे हो” और किसी एक नेता की पूजा नहीं की जा रही है। उनके इस गुस्से का तात्पर्य था कि पार्टी को एकजुट रहना चाहिए न कि किसी विशेष नेता के प्रति अपनी वफादारी दर्शाने की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस घटना के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस के अंदर के संघर्ष और नेतृत्व के प्रति निष्ठा जताने की कोशिशों को दर्शाता है। आप इस बारे में और क्या जानना चाहेंगे? Post navigation **मोदी सरकार के मंत्री जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया मंजूर** केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा मंजूर कर लिया गया है। उनका यह कदम ऐसे समय में आया है जब भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया। कुरियन, मोदी सरकार में एकमात्र ईसाई मंत्री थे। जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हुआ, और उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। विभिन्न समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, कुरियन ने भाजपा में अपनी स्थिति को लेकर निराशा जताई थी। अब देखने वाली बात यह होगी कि उनके इस्तीफे का क्या असर होगा और भविष्य में भाजपा अपनी योजना को किस प्रकार आगे बढ़ाएगी। नीट परीक्षा को लेकर छात्र और उनके माता-पिता की प्रतिक्रिया में कई बातें शामिल थीं। स्टूडेंट्स ने ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता और परीक्षा की तैयारी की कठिनाइयों के बारे में बात की। कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों की मेहनत और संघर्ष की सराहना की, जबकि कई ने परीक्षा के तनाव को लेकर चिंता व्यक्त की। कई बच्चों ने कहा कि वे दोबारा परीक्षा देने के लिए तैयार हैं और अपनी गलतियों से सीखने का मौका देख रहे हैं। अभिभावकों ने भी बच्चों के प्रति समर्थन व्यक्त किया और कहा कि इस परीक्षा का उनके भविष्य पर बड़ा असर पड़ेगा। सभी ने परीक्षा की स्वच्छता और निष्पक्षता पर जोर दिया, जिससे छात्रों को बेहतर परिणाम की उम्मीद हो सकती है। इसी तरह के मुद्दों पर चर्चा की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाएं केवल एक शैक्षणिक चुनौती नहीं हैं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।